मैया मेरी

कीर्तन
एक बात मैया मेरी याद रखना...मन्जू गोपालन/श्री सनातन धर्म महिला समिति, कीर्तन स्थान: बाग मुज़फ़्फ़र खां, आगरा यहां क्लिक करके यू ट्यूब पर देखिए मैया मेरी
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Friday, January 11, 2013

साई

साई बोल मूरख
हाल ही में हमारे क्षेत्र में एक जुलूस निकला- अंग्रेजी बैण्ड बाजों के साथ। आगे एक वाहन में गणेशजी की प्रतिमा, उसके पीछे साई बोल कहती ज्यादा महिलाएं-लड़कियां और कुछ पुरुष फ़िर साई बाबा की प्रतिमा। ऐसे द्रूश्य तमाम बस्तियों में साई के व्यवसाय के प्रचार के रूप में दिखाई दे जाते हैं। यहीं अक्सर ऐसे छोटे-बड़े जुलूस निकलते रहते हैं। हिन्दू धन्य होते हैं कि उन्हें एक और संकटमोचक (?) मिल गया। कारण, साई को राम, कृष्ण, विष्णु, शिव आदि देवताओं के साथ नत्थी कर दिया गया है, जैसे- ॐ साई राम।  इस आशय के तमाम चित्र नेट पर मौजूद हैं। साई महिमा की तमाम कहानियां प्रचलित की गई हैं। कुछ टीवी चैनल भी इस धन्धे में शामिल हैं। फ़िल्म-डॉल्यूमेण्टरी बन गयीं। तमाम ब्लॉग-वेबसाइटें मौजूद हैं। फ़ुटपाथ-जमीनों पर कब्जजा कर उसके मन्दिर बनाए जा रहे हैं। यही नहीं लालची लोग हिन्दू मन्दिरों में साई की मूर्तियां स्थापित कर लोगों की अन्ध श्रद्धा से धन्धा बढ़ाने में लगे हुए हैं। साई की मूर्ति मन्दिर में होन एक फ़ैशन का रूप ले चुका है। सनातन धर्म के भजन-कीर्तनों में साई भजन की फ़रमाइश भी उठती है। जमकर महिमामण्डन हो रहा है। मूर्ख बनाया जा रहा है और हम खुशी-खुशी बन भी रहे हैं।















शिरडी के साई
साभार/लिन्क: https://hindurashtra.wordpress.com/2012/04/12/shirdi-sai-baba/
संत वही होता है जो लोगो को भगवान से जोड़े , संत वो होता है जो जनता को भक्तिमार्ग की और ले जाये , संत वो होता है जो समाज मे व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए पहल कर इस साई नाम के मुस्लिम पाखंडी फकीर ने जीवन भर तुम्हारे राम या कृष्ण का नाम तक नहीं लिया और तुम इस साई की काल्पनिक महिमा की कहानियों को पढ़कर इसे भगवान मान रहे हो। कितनी भयावह मूर्खता है ये! महान ज्ञानी ऋषि-मुनियो के वंशज आज इतने मूर्ख और कलुषित बुद्धि के हो गए हैं कि उन्हें भगवान और एक साधारण से मुस्लिम फकीर में फर्क नज़र नहीं आता ? जब आज तक कभी कोई मुस्लिम तुम्हारे शिवलिंग पर दूध या जल चढ़ाने नहीं आया, कभी तुम्हारे हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाने नहीं आया, कभी तुम्हारे विष्णु जी पर तुलसी-दल या असंख्यों मंदिरो में स्थापित मूर्तियों पर पुष्प चढ़ाने नहीं आया तो तुम किस मुंह से सडी़ हुयी लाशों के ऊपर बनी कब्रों,दरगाहों और मजारों पर चादर चढ़ाने पहुच जाते हो? शरम नहीं आती। वो तुम्हारे भगवान को गालिया देते है, निंदा करते है और दिन मे एक दो नहीं पाँच पाँच बार मस्जिद से साफ साफ चिल्लाते हैं कि एकमात्र ईश्वर अल्लाह है और कोई है ही नहीं। तो तुम्हें सुनाई नहीं देता क्या। या फिर तुम्हारी ऐसी कौन सी इच्छा है जो कि हमारे परमकृपालु, दयालु ,भक्तवत्सल भगवान पूरी कर ही नहीं सकते, उसे या तो सड़े हुये मुर्दे की हड्डिया पूरा कर सकती है, या फिर शिरडी मे जन्मा एक मुस्लिम फकीर साई! आखिर जाते क्यों हो? जब तुम्हारी प्यास भगवान रूपी गंगाजल से नहीं बुझ रही तो दरगाह और साई रूपी कुंए के पानी से कैसे बुझ जाएगी? गंगाजल को छोडकर कीचड़ की ओर भागने वाले कितने महामूर्ख होते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन अंधभक्तों को दुनिया भर के तर्क, तथ्य, प्रमाण तक दे दिये, यहा तक कि श्री कृष्ण भगवान द्वारा गीता में इसी विषय पर कहा गया एक श्लोक तक दिखा दिया पर इन धूर्तों की बुद्धि , कलयुग के पाप ने इतनी कुंठित और प्रदूषित कर दी है कि इन्हे समझ ही नहीं आता। गीता में श्री कृष्ण भगवान जी ने साफ साफ कहा है कि जो जिसे पूजता है वो उसे ही प्राप्त होता है यानि मरे हुये व्यक्तियों को सकाम भाव से पूजने वाला पिशाच योनि को प्राप्त होता है। ये स्वयं श्री कृष्ण ने कहा तो भी इन मूर्खो मे इतनी भी बुद्धि नहीं बची कि समझ जायें कि साई को पूजने वाले मृत्युपर्यंत पिशाच बनकर ही भटकेंगे।
तुम चाहे कितना भी साई-साई चिल्लाओ गला फाड़ फाड़ के, चाहे दरगाहों पर जाकर कितनी भी चादर चढालो, तुम श्री भगवान को तो क्या उनकी कृपा का एक अंश भी प्राप्त नहीं कर सकते। ये सत्य है साई ने ऐसा क्या कर दिया था जो तुम्हारा गला नहीं दुखता उसकी महिमा गाते गाते? अरे पूरा भारत उस समय अंग्रेज़ों के डंडे खा रहा था, साई ने बचाया था क्या? अगर वो भगवान था या संत था तो उसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी भारत माता को स्वतन्त्रता दिलाने के लिए क्या किया था? उस समय श्री कृष्ण की प्रिय सर्वदेवमई गोमाताएं काटी जाती थीं उनके ऊपर साई कभी क्यों नहीं बोला? भगवान श्री कृष्ण थे, जब कंस के अनुचर गोमाताओ को ले जाने लगे तो, उन्हें मार कर परलोक पहुंचा दिया था और एक ये साई था कि हजारों गोमाताएं रोज कटती रहीं ये बचाना तो दूर उनके ऊपर कभी बोला तक नहीं? काहे का भगवान या संत था ये ? क्या इस भूमि की सनातनी संतानें इतनी बुद्धिहीन हो गयी हैं कि जिसकी भी काल्पनिक महिमा के गपोड़े सुन ले उसी को भगवान और महान मानकर भेडॉ की तरह उसके पीछे चल देती है? इसमे हमारा नहीं आपका ही फायदा है।  श्रद्धा और अंधश्रद्धा में फर्क होता है, श्रद्धालु बनो, भगवान को चुनो, राम और कृष्ण के बनो, साई के बनाकर सिर्फ भूत प्रेत बनाकर ही भटकोगे ….. जय श्री राम कृष्ण ……… जय सनातन धर्म
साई भक्तों के लिए दस प्रश्न – अगर किसी भी साई भक्त के पास इन दस प्रश्नो का उत्तर हैं तो में भी साई का भक्त बनूँगा और उत्तर नहीं है तो कृपया मेरी फ्रेंड लिस्ट से विदा लेले, सचिन शर्मा को ऐसे मित्रो की आवश्यकता नहीं है चाहे कोई भी हो कोई फालतू की बहस नहीं, कुतर्क नहीं, जिसके पास सभी प्रश्नो का सार्थक जवाब हो उत्तर दे। कोई सुझाव नहीं चाहिए और अगर इनके उत्तर नहीं है या इन्हे पढ़ने के बाद शर्म आए तो भगवान की और बढ़ो, कल्याण होग।
1 – साई को अगर ईश्वर मान बैठे हो अथवा ईश्वर का अवतार मान बैठे हो तो क्यों? आप हिन्दू हैं तो सनातन संस्कृति के किसी भी धर्मग्रंथ में साई महाराज का नाम तक नहीं है। तो धर्मग्रंथों को झूठा साबित करते हुए किस आधार पर साई को भगवान मान लिया? और धर्मग्रंथ कहते हैं कि कलयुग में दो अवतार होने है एक भगवान बुद्ध का हो चुका दूसरा कल्कि नाम से अंतिम चरण में होगा।
2 – अगर साई को संत मानकर पूजा करते हो तो क्यों? क्या जो सिर्फ अच्छा उपदेश दे दे या कुछ चमत्कार दिखा दे वो संत हो जाता है? साई महाराज कभी गोहत्या पर बोले? साई महाराज ने उस समय उपस्थित कौन सी सामाजिक बुराई को खत्म किया या करने का प्रयास किया? ये तो संत का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है और फिर संत ही पूजने हैं तो कमी थी क्या ? यह फकीर ही मिला ?
3- अगर सिर्फ दूसरों से सुनकर साई के भक्त बन गए हो तो क्यों? क्या अपने धर्मग्रंथो पर या अपने भगवान पर विश्वास नहीं रहा ?
4 – अगर मनोकामना पूर्ति के लिए साई के भक्त बन गए हो तो तुम्हारी कौन सी ऐसी मनोकामना है जो कि भगत्वतसल भगवान शिवजी या श्री विष्णु जी या कृष्ण जी या राम जी पूरी नहीं कर सकते सिर्फ साई ही कर सकता है? तुम्हारी ऐसी कौन सी मनोकामना है जो कि वैष्णो देवी या हरिद्वार या वृन्दावन या काशी या बाला जी में शीश झुकाने से पूर्ण नहीं होगी वो सिर्फ शिरडी जाकर माथा टेकने से ही पूरी होगी।
5 – तुम्हारे पूर्वज सुबह और शाम श्री राम या कृष्ण या शिव शिव ही बोलते थे फिर तुम क्यों सिर्फ प्रचार को सुनकर बुद्धि को भ्रम में डालकर साई-साई चिल्लाने लगे हो?
6 – अगर भगवान कि पूजा करनी है तो इतने प्यारे,दयालु ,कृपालु भगवान है न तुम्हारे पास फिर साई क्यों ? अगर संतों की पूजा करनी है तो साई से महान ऋषि मुनि हैं न साई ही क्यों?
7 -मुस्लिम अपने धर्म के पक्के होते है अल्लाह के अलावा किसी और की और मुंह भी नहीं करते जब कोई अपना बाप नहीं बदल सकता अथवा अपने बाप कि जगह पर किसी और को नहीं देख सकता तो तुम साई को अपने भगवान की जगह पर देखकर क्यों दुखी या क्रोधित नहीं होते?
8 -अगर सनातन धर्मी हो तो सनातन धर्म में तो कहीं साई है ही नहीं। तो आप खुद को सनातन धर्मी कहलाना पसंद करोगे या धर्मनिरपेक्षी साई भक्त?
9 – आप खुद को राम या कृष्ण या शिव भक्त कहलाने में कम गौरव महसूस करते हैं क्या जो साई भक्त होने का बिल्ला टाँगे फिरते हैं? क्या राम और कृष्ण से प्रेम का क्षय हो गया है?
10 – ॐ साई राम ॐ हमेशा मंत्रों से पहले ही लगाया जाता है अथवा ईश्वर के नाम से पहले साई के नाम के पहले ॐ लगाने का अधिकार कहां से पाया? जय साई राम श्री में शक्ति माता निहित है श्री शक्तिरूपेण शब्द है  जो कि अक्सर भगवान जी के नाम के साथ संयुक्त किया जाता है तो जय श्री राम में से श्री तत्व को हटाकर साई लिख देने में तुम्हें गौरव महसूस होना चाहिए या शर्म आनी चाहिए?
ये जो नीचे फोटो है ऐसे फोटो आजकल चोराहों पर लगाकार भगवान का खुलेआम अपमान और हिन्दुओं को मूर्ख बनाया जा रहा है? मुस्लिम साई के चक्कर में नहीं पड़ते धर्म के पक्के है सिर्फ अल्लाह हिन्दू प्रजाति ही हमेशा मूर्ख क्यो बनती है। 
जय श्री राम! जय सनातन धर्म!!

Sunday, August 29, 2010

जन्माष्टमी-२०१०

श्री सनातन धर्म महिला समिति का
१२वां भव्य आयोजन
२ सितम्बर, २०१०, गुरुवार
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव २०१०
आप सादर आमन्त्रित हैं
आयोजक: मन्जू गोपालन
विवरण पर्चा


































पृष्ठ ४ और १ (ऊपर), पृष्ठ २-३ (नीचे)
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Tuesday, July 21, 2009

श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

श्री सनातन धर्म महिला समिति द्वारा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन

मंजू गोपालन के अथक प्रयासों और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से हर वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित होता है। इसमें छोटे-छोटे बच्चों की प्रमुख रूप से भागीदारी होती है। मंजू गोपालन द्वारा लगभग एक माह तक 10-12 साल तक की आयु के बच्चों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है। काफी अभ्यास के बाद बच्चे मंच पर मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं जिसे श्रद्धालु दर्शकों की भरपूर सराहना मिलती है।

श्री सनातन धर्म महिला समिति द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। भाद्रपद श्री कृष्ण अष्टमी, विक्रम सम्वत् 2066 यानी 13 अगस्त, 2009 को स्थानीय शारदा कॉन्वेंट स्कूल 25 फुट रोड, चाणक्य प्लेस के प्रांगण में आयोजित होने वाला यह 11वां कार्यक्रम होगा।

मंजू गोपालन के अथक प्रयासों और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से हर वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित होता है। इसमें छोटे-छोटे बच्चों की प्रमुख रूप से भागीदारी होती है। मंजू गोपालन द्वारा लगभग एक माह तक 10-12 साल तक की आयु के बच्चों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है। काफी अभ्यास के बाद बच्चे मंच पर मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं जिसे श्रद्धालु दर्शकों की भरपूर सराहना मिलती है। इस अवसर पर सजीव झांकियां, विशेष नृत्य, डांडिया नृत्य, श्री कृष्ण बाल रूप सज्जा, विशेष भजन-कीर्तन, श्री कृष्ण जन्म, प्रसाद वितरण आदि के अलावा विशेष अतिथि द्वारा प्रतिभागी बच्चों को प्रमा पत्र तथा उपहार प्रदान किये जाते हैं।

स्कूल प्रांगण श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाता है। लोग आसपास के मकानों की छत पर बैठकर और सड़क पर खड़े रहकर भी कार्यक्रम देखते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए गत वर्ष प्रांगण के बाहर एक बड़ा पर्दा लगाया गया जिससे बाहर खड़े लोगों ने भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पूरे कार्यक्रम का आनन्द लिया। इसके साथ ही स्थानीय चाणक्य केबल टीवी नेटवर्क के माध्यम से श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। बाद में इस कार्यक्रम को केबल पर ही कई बार दिखाया गया।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अवसर पर हिन्दी-ब्रज भाषा में आयोजित होने वाला क्षेत्र का एकमात्र अनूठा कार्यक्रम होता है जिसका पूरा श्रेय मंजू गोपालन को ही जाता है। इस धार्मिक आयोजन के लिए क्षेत्रवासी उनकी खूब प्रशंसा करते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति की मंजू गोपालन मूल रूप से आगरा की हैं। सन् 1984 से वे दिल्ली में रह रही हैं। चाणक्य प्लेस क्षेत्र में हिन्दी-ब्रज भाषा के भजन-कीर्तन की लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने श्री सनातन धर्म महिला समिति के अन्तर्गत सन् 1995 में छोटी सी कीर्तन मण्डली का शुभारम्भ किया। उनके इस प्रयास की खूब सराहना हुई और लोगों ने उनके भजन-कीर्तन को बहुत पसन्द किया। धीरे-धीरे उनको लोग जान गये।

आज पूरे क्षेत्र में हिन्दी-ब्रज भाषा की उनकी ही एकमात्र मण्डली है। अपने क्षेत्र चाणक्य प्लेस के अलावा वे जनकपुरी, रोहिणी, जीवन पार्क, सागरपुर, महिन्द्रा पार्क, द्वारका, तिल नगर, राजा गार्डन, हरि नगर, पहाड़ गंज, ककरोला, मधु विहार, महावीर एन्क्लेव, ओम विहार, सीतापुरी, दशरथपुरी, पालम, कनॉट प्लेस, पीतमपुरा, सरिता विहार, दीपाली चैक, उत्तम नगर, नजफगढ़ आदि विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के आमंत्रण पर वे भजन-कीर्तन का कार्यक्रम प्रस्तुत करती रही हैं। प्रायः जन्म दिन, शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नये कार्य या व्यवसाय के शुभारम्भ, किसी शुभ अवसर पर या फिर जब मन करे तब उनसे भजन-कीर्तन करने का आग्रह किया जाता है। नवरात्र के दौरान वे काफी व्यस्त रहती हैं। एक दिन में 3 स्थानों पर भी जाना पड़ता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का कार्यक्रम रात्रि 8.30 से मध्य रात्रि 12.30 बजे तक जारी रहता है। इस भव्य आयोजन में 10-12 वर्ष तक की आयु के बच्चे शामिल किये जाते हैं। सभी बच्चे पूरे उत्साह के साथ जमकर अभ्यास करते हैं और मंच पर अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। मंच पर नृत्य नाटिका, नृत्य, डांडिया नृत्य आदि के साथ-साथ बाल श्री कृष्ण रूप सज्जा, विशेष अतिथि द्वारा प्रमाण पत्र व उपहार वितरण कार्यक्रम को श्रद्धालु प्रेमपूर्वक देखते हैं और अनेकानेक बार तालियां बजाकर सराहना करते हुए बच्चों का उत्साह बढ़ाते हैं। उल्लेखनीय है कि श्री कृष्ण बाल रूप सज्जा में मोर पंख के उपयोग की मनाही होती है।

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आप
बनें सह
योगी
आप श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के आयोजन में
अपना सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है।
कृपया सम्पर्क करें- bhajankeertan@gmail.com b
� बच्चों के लिए उपहार (अनुमानित संख्या)- 25
� कार्यक्रम के आयोजन में विविध कार्यों हेतु
� प्रसाद-भण्डारा
आप चाहेंगे तो सहयोगियों की सूची में आपका
नाम भी प्रकाशित किया जाएगा।
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बच्चों की प्रस्तुतियां समाप्त होने के बाद लगभग आधा घण्टा विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। ठीक मध्य रात्रि 12 बजे जब श्री कृष्ण के जन्म की घोषणा की जाती है तो पूरा वातावरण उल्लासमय हो जाता है। हर तरफ जय कन्हैया लाल की और श्री कृष्ण की जय-जयकार गूंजने लगती है। आरती के बाद भोग लगाया जाता है और फिर पिसे धनिये, देशी घी, बूरे, मेवों फलों आदि से बना विशेष प्रसाद और दही, दूध, तुलसी, 5 मेवाओं, शहद, चीनी आदि से बना चरणामृत श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के छठवें दिन छठी मनायी जाती है। इस अवसर पर अपरान्ह 2 बजे विशेष भजन-कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसके बाद पारम्परिक रूप से तैयार 6 वस्तुओं- मूंग की दाल, रोटी, कढ़ी, चावल, बेसन के लड्डू और हलुआ के अलावा भण्डारे के रूप में तैयार की गयी सामग्री पूड़ी, आलू की सब्जी और खीर का भोग लगाया जाता है। सायं लगभग 4।30 बजे प्रसाद के रूप में भण्डारे की सामग्री का वितरण किया जाता है जो 4-5 घण्टे निरन्तर चलता रहता है।

यह पूरा आयोजन एक अकेली मंजू गोपालन जैसी महिला की सामर्थ्य के बल पर ही हो पाता है। इन्होंने स्थानीय लोगों को जब कार्य करके दिखया तो धीरे-धीरे लोग जुड़ते चले गये। अब लोग स्वयं आगे आकर अपना सहयोग देने की इच्छा जताते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के आयोजन को लेकर अनेक लोगों के विरोध और उनके द्वारा रुकावटें पैदा करने का भी उन्होंने दृढ़ता से सामना किया। कुछ शरारती और स्वयं को प्रभावशाली समझने का भ्रम पाले हुए लोगों ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के आयोजन को रोकने के लिए खूब चालें चलीं। लोगों से सहयोग न करने की अपील वाले पीले रंग के पर्चे भी बंटवाए।

धुन की पक्की मंजू गोपालन ने हार नहीं मान और उन्होंने सब श्री कृष्ण पर छोड़ दिया और वे पूरे परिवार के साथ श्री कृष्ण की सेवा में लगी रहीं। परिजनों का भरपूर सहयोग उन्हें हर बार मिलता रहा। राजनीति में सक्रिय स्थानीय समाज सेवी श्री अनिल ठाकुर इस आयोजन में विशेष रूप से रुचि लेकर गत 3 वर्षों से अपना भरपूर सहयोग दे रहे है। यहां के लोगों को मंजू गोपालन पर जो विश्वास था उसे वे अपनी चालबाजियों से डिगा नहीं सके। मजे की बात यह भी है कि उन चालबाजों में शामिल कुछ लोग अब मंजू गोपालन का ही सहयोग करते हैं। उल्लेखनीय है कि इस पूरे आयोजन में काफी समय, श्रम, धन आदी की आवश्यकता पड़ती है। मंजू गोपालन की हार्दिक अभिलाषा है कि वे श्री राधा कृष्ण का एक भव्य मन्दिर बनवाएं, देखें उनकी यह अभिलाषा कब पूरी होती है! वैसे उन्होंने अपनी यह अभिलाषा श्री कृष्ण पर ही छोड़ दी है-आप जानें...

प्रस्तुति: वी. कुमार



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